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अडानी एंटरप्राइजेज का एंटरप्राइजेज व्यवसाय, अडानी विलमार ज्वाइंट वेंचर से बाहर निकलने का बड़ा फैसला

Uma Imagem 10 टिप्पणि 31 दिसंबर 2024

अडानी एंटरप्राइजेज का निर्णय: महत्वपूर्ण बदलाव का सूचित

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने अपने ज्वाइंट वेंचर अडानी विलमार लिमिटेड से बाहर निकलने के निर्णय के साथ भारतीय व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। भारतीय भरोसेमंद खाद्य एफएमसीजी कंपनी अडानी विलमार के साथ विलमार इंटरनेशनल की साझेदारी ने कई वर्षों से बाजार में अपना स्थान बनाया है। करीब $2 बिलियन के इस सौदे में अडानी एंटरप्राइजेज अपनी 44% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है, जिससे इसे अपने वित्तीय संसाधनों को सुधारने का अवसर मिलेगा। इस महत्वपूर्ण कदम का असर न केवल कंपनी के व्यापारिक समर्थकों पर पड़ेगा, अपितु इसके दीर्घकालिक व्यवसाय योजनाओं पर भी।

सौदे की शर्तें और इसके प्रभाव

इस समझौते के तहत अडानी एंटरप्राइजेज दो चरणों में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी। सबसे पहले, अपनी 13% हिस्सेदारी बेची जाएगी ताकि सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों का पालन किया जा सके। इसके बाद, शेष 31% हिस्सेदारी विलमार इंटरनेशनल द्वारा खरीदी जाएगी, जिसमें प्रति शेयर मूल्य INR 305 तक सीमित किया गया है। यह प्रक्रिया मार्च 2025 तक पूरी होने की संभावना है। इस सौदे से प्राप्त धन का प्रयोग अडानी एंटरप्राइजेज अपने ऊर्जा और उपयोगिताओं, परिवहन और लॉजिस्टिक तथा अन्य प्राथमिक उद्योगों में करने की योजना बना रहा है।

अडानी विलमार की गहनता और व्यापकता

अडानी विलमार, जो 2022 में सूचीबद्ध हुआ था, एक अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई है। इसके 24 कारखाने 15 शहरों में स्थित हैं और इसके वितरण नेटवर्क में 10,000 से अधिक वितरक शामिल हैं। इस कंपनी की उत्पाद पहुँच 30 से अधिक देशों तक है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत करती है। ऐसे समय में, जब यह कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज की अख्तियार में थी, इसके विस्तार और वृद्धि का अद्वितीय रिकॉर्ड रहा है।

विलमार इंटरनेशनल की रणनीतिक योजनाएं

विलमार इंटरनेशनल, जिसने पहले से ही अडानी विलमार में अपना 44% हिस्सा रखा है, अब इसे पूरी तरह नियंत्रित करने की ओर अग्रसर है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह इस अधिग्रहण के बाद अडानी विलमार की वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए नए रणनीतिक निवेशकों को जोड़ने की योजना बना रही है। इससे कंपनी की धारा में नए अवसरों और संभावनाओं का प्रवेश होगा, जो इसे भारत और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करने में समर्थन करेगा।

परिवर्तन के संकेत: नाम में बदलाव

सौदे के असमाप्त होने के बाद, अडानी विलमार का नाम बदलने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह नाम परिवर्तनों के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है जैसे AWL Ltd, AWL Agri Business Ltd, Fortune Agri Business Ltd, आदि जो भारत के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा अनुमोदित होंगे।

यह निर्णय ना केवल व्यावसायिक रणनीति का परिणाम है बल्कि अडानी एंटरप्राइजेज की अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित करने की नई छलांग है। यह व्यापार सौदा बाजार में अडानी एंटरप्राइजेज की स्थिरता और दीर्घावधि रणनीति को बेहतर ढंग से प्रशस्त करेगा।

10 टिप्पणि

  1. suresh sankati
    suresh sankati
    जनवरी 2 2025

    अडानी विलमार से बाहर निकलना? यानी अब तेल-चीनी के बाजार में अपना हाथ नहीं डालेंगे? ये तो बिल्कुल वो है जब तुम अपनी गर्म चाय छोड़कर ठंडे पानी पीने लग जाओ। 😏

  2. Pooja Kri
    Pooja Kri
    जनवरी 4 2025

    This move is strategic... aligning with core competencies... divestment of non-core assets... but the regulatory clearance timeline... is it really feasible by march 2025? the capital allocation... needs to be transparent...

  3. Sanjeev Kumar
    Sanjeev Kumar
    जनवरी 6 2025

    सोचो एक जंगल है जिसमें हर पेड़ अपना फल देता है... अडानी एंटरप्राइजेज ने अब सिर्फ उन पेड़ों को रखने का फैसला किया है जिनके फल से दुनिया भर में भूख मिटती है... विलमार तो अब अपने ही जंगल में बसेगा... दोनों के लिए अलग-अलग आकाश हो सकता है

  4. Hemlata Arora
    Hemlata Arora
    जनवरी 7 2025

    This decision reflects a lack of long-term vision. Food security is not a sideline. Divesting from FMCG is short-sighted and potentially dangerous for national interests. The government should intervene.

  5. manohar jha
    manohar jha
    जनवरी 8 2025

    भाई, अडानी विलमार का ओलेरा तो हम सब खाते हैं... अब नाम बदलेगा तो भी तो तेल वैसा ही रहेगा... बस बॉक्स पर अडानी का नाम हट जाएगा... चलो देखते हैं, अब कौन सा नाम लगेगा... Fortune? वो भी तो एक नाम है 😄

  6. Nitya Tyagi
    Nitya Tyagi
    जनवरी 10 2025

    Again... another corporate drama... why do we even care? 🙄... They sell oil, we buy it... they change names, we still cook... but now they're going to 'strategically realign'? What does that even mean? It just means they're tired of managing food... and now they'll just... sit back... and count money... 😒

  7. Sanjay Verma
    Sanjay Verma
    जनवरी 11 2025

    Did you guys notice? The 13% public float is a smart move - makes it easier for retail investors to jump in. And INR 305/share? That’s a premium, but not insane considering their 24 plants and 10K+ distributors. This is a clean exit. 🔍

  8. surabhi chaurasia
    surabhi chaurasia
    जनवरी 12 2025

    This is wrong. Food should not be owned by billionaires. It should belong to the people. Selling it to a foreign company? Shameful.

  9. Amresh Singh knowledge
    Amresh Singh knowledge
    जनवरी 14 2025

    The restructuring reflects a mature corporate strategy. Focusing on infrastructure and logistics while allowing FMCG to be independently scaled under global expertise is a textbook example of value maximization. This benefits shareholders, employees, and consumers alike.

  10. Rahul Madhukumar
    Rahul Madhukumar
    जनवरी 15 2025

    Lmao they're ditching food like it's last year's trend. Meanwhile, we're still eating their oil and sugar. So what? They make billions and now they're 're-focusing'? Bro, you didn't fail - you just got bored of feeding the country. 😂

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